प्रयागराज में चुप ताज़िया के साथ खत्म हुआ अय्यामे अज़ा*

By | October 26, 2020

प्रयागराज से ब्यूरो चीफ जफरुल हसन की रिपोर्ट

चौदह सदियाँ गुज़रने के बाद भी आज तक ज़िन्दा है हुसैन ए मज़लूम का ग़म””””””

माहे मोहर्रम के चाँद के साथ शुरु हुई दो माह और आठ दिनों की अज़ादारी इमाम हसन अस्करी की शहादत पर ग़म मनाने के साथ हुई खत्म

करबला के शहीदों की याद मे लगातार ६८ दिनों तक मनाए जाने वाले ग़म का सिलसिला चुप ताज़िया निकलने के साथ माहे रबिउल अव्वल की आठवीं को खत्म हो गया।रानीमण्डी चकय्या नीम स्थित इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग मे बशीर हुसैन की क़यादत में दस दिवसीय अशरा ए चुप ताज़िया के अंतिम दिन चुप ताज़िया जुलूस नहीं निकाला गया।इमामबाड़े के अन्दर ही ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने करबला के बहत्तर शहीदों की राहे हक़ मे दि गई क़ुरबानी का ज़िक्र किया।शहादते इमाम हसन अस्करी पर मसायबी बयान करते हुए अय्यामें अज़ा को अलवेदा कहा।शबीहे ताबूत , चुप ताज़िया,अलम और ज़ुलजनाह की शबीह की ज़ियारत इमामबाड़े के अन्दर ही करवाई गई।अन्जुमन हैदरया के नौहाख्वान हसन रिज़वी व साथियों ने क़दीमी नौहा पढ़ कर माहे ग़म माहे अज़ा को अलवेदा कहा।जुलूस के आयोजक बब्बू भाई की अगुवाई मे इमामबाड़ा के आस पास सैनिटाईज़्ड करवाने के बाद मास्क लगाने के उपरान्त ही अक़ीदतमन्दों को इमामबाड़े में प्रवेश कराया गया।प्राताः ९ बजे से दिन भर ज़ियारत करने वालों का ताँता लगा रहा।वहीं दरियाबाद के बंगले से तुराब हैदर की निगरानी में निकलने वाला चुप ताज़िया और अमारी का जुलूस इस वर्ष नहीं निकालते हुए इमामबाड़ा परिसर में दिन मे ११ बजे मजलिस हुई।एक एक मातमी अन्जुमनों से मात्र एक नौहा पढ़ने के बाद अपनी अन्जुमन के परचम के साथ बिना नौहा और मातम के सादगी के साथ अरब अली खाँ के इमामबाड़े में प्रवेश कराया गया जहाँ प्रत्येक अन्जुमनों को आधा आधा घन्टा नौहा और अलवेदा पढ़ने की इजाज़त दी गई।उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव व अन्जुमन के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी के मुताबिक़ अन्जुमन शब्बीरिया,अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया,अन्जुमन अब्बासिया,अन्जुमन हुसैनिया क़दीम,अन्जुमन हाशिमया के नौहाख्वानों ने अय्यामें अज़ा के आखरी दिन जनाबे ज़हरा को पुरसा पेश करते हुए ग़मगीन नौहा पढ़ा।संचालक अनीस रिज़वी द्वारा मातमी दस्तों को क्रम वार आमंत्रित कर नौहा पढ़ने और मातम करने के बाद भीड़ न लगाते हुए अपने अपने घर जाने की ताकीद की जाती रही।अन्जुमन गुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वानों ने मरहूम शायर काविश इलाहाबादी का लिखा विश्वविख्यात नौहा
सरे सरवर से यह आई सदा ज़ैनब मेरी ज़ैनब!!!!
मैं तुमसे रुख्सत होता हूँ सलामे आखरी ले लो!!!!
तुमहारा है निगेह बाँह अब खुदा ज़ैनब मेरी ज़ैनब!!!!
पढ़ कर अश्कों का नज़राना पेश किया।अय्यामे अज़ा के आखरी दिन होने के कारण दिन भर बड़ी संख्या में हुसैन ए मज़लूम के चाहने वालों का ताँता लगा रहा।अलम ताज़िया,ताबूत,ज़ुलजनाह और अमारी पर फूल माला चढ़ा कर लोगों ने मन्नते व मुरादें मांगी।देर रात तबर्रुक़ात पर चढ़ाए गए फूलों को ग़मज़दा माहौल में सुपुर्देखाक किया गया।मौलाना जव्वाद हैदर,मौलाना रज़ी हैदर,मौलाना मो० ताहिर,मंज़र कर्रार,गौहर काज़मी,रिज़वान जव्वादी,तुराब हैदर,सै०मो०अस्करी,तय्याबैन आब्दी,रौनक़ सफीपुरी,ताहिर मलिक,नजीब इलाहाबादी,शाहिद अब्बास रिज़वी (प्रधान),मुमताज़ हुसैन,मिर्ज़ा काज़िम अली,डॉ क़मर दरियाबादी, ताशू अल्वी,शाह बहादर,हुसैन बहादर,सफदर डेज़ी,शबी हसन,मशहद अली खाँ,मिर्ज़ा अज़ादार हुसैन,ज़ामिन हसन,अब्बास ज़ैदी,अर्शी,ज़ुलकरनैन आब्दी,शादाब ज़मन,अस्करी अब्बास,शबीह अब्बास,अखलाक रज़ा,ज़हीर अब्बास,यासिर ज़ैदी,ऐजाज़ नक़वी,कामरान रिज़वी,अकबर रिज़वी,अली रज़ा रिज़वी,शबीह रिज़वी,अज़ीम,मो०असद,अज़ीम हैदर,अब्बास नक़वी,औन ज़ैदी,जौन ज़ैदी आदि समेत बड़ी संख्या में अक़ीदतमन्दों ने शिरकत की।

प्रशासन के सहयोग के प्रति जताया आभार

अय्यामे अज़ा के दो माह और आठ दिनों तक कोविड १९ के बाद भी घरों व इमामबाड़ो के अन्दर सभी मातमी कार्यक्रम को सकुशल सम्पन्न कराने में ज़िला प्रशासन ने जिस प्रकार सहयोग किया उसके लिए शहर के ओलमाओं और मातमी अन्जुमनों ने प्रशासन के सहयोगात्मक रवय्ये की सराहना करते हुए समबन्धित थाना अध्यक्षो सहित आला अधिकारीयों के सहयोग के लिए आभार जताया

मोहाफिज़े अज़ा के अमारी जुलूस में शामिल हुई देश की ख्याति प्राप्त अन्जुमने

दरियाबाद पीपल चौराहे पर अन्जुमन मोहाफिज़े अज़ा का अमारी जुलूस न निकालते हुए दरियाबाद क़ब्रिस्तान मे मौला अली के रौज़े के क़रीब शब्बेदारी की शक्ल मे तबदील करते हुए देश की ख्याति प्राप्त अन्जुमनों सहित शहर की मशहूर ओ मारुफ अन्जुमनों ने शिरकत की। कब्रिस्तान मे बनाए गए विशाल मंच पर दोनो छोर पर हज़रत अब्बास का अलम नसब कर मजलिस हुई।मौलाना सै०कल्बे अब्बास रिज़वी की तक़रीर के बाद अनीस जायसी और तूफान दरियाबादी के संयुक्त संचालन में पुरी रात मातमी अन्जुमनों ने नौहा और मातम के साथ अय्यामे अज़ा को अलवेदाई नौहा पढ़ कर नम आँखों से विदा कहा।आयोजन कमेटी के सै०अज़ादार हुसैन ने सभी बैरुनी व मुक़ामी अन्जुमनों को धन्यावाद ज्ञापित किया।

ईद ए ज़हरा आज-खुशनूमा माहौल में सजेगी महफिल

६८ दिवसीय अय्यामे अज़ा के खत्म होने पर मुहर्रम की चाँद रात पर शिया समुदाय की औरतों द्वारा तोड़ी गई चूड़ियाँ फिर से कलाई पर सजेंगी।काले लिबास त्याग कर लाल पीले गुलाबी रंग के लिबास फिर तन को ज़ेबा देंगे।दो माह और आठ दिनों से बन्द चल रहे शादी विवाह और खुशियों के कार्यक्रम फिर से शुरु हों जाएँगे।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी के मुताबिक ९ रबिउल अव्वल मंगलवार को विभिन्न मातमी अन्जुमनों की ओर से ईद ए ज़हरा की महफिल सजेगी।घरों में सेंवई के साथ गुलगुले और पकौड़ीयाँ भी तली जाएँगी।अन्जुमन ग़ुन्चा ए कासिमया की ओर से बख्शी बाज़ार स्थित खुरशैद साहब के अहाते में शाम ७:३० पर जश्ने ईद ए ज़हरा की महफिल सजेगी।ओलमाओं की तक़रीर के साथ शायराना महफिल में शहर के मानिन्द शायर भाग लेंगे।वहीं रानीमण्डी,करैली,दरियाबाद,चक ज़ीरो रोड मे विभिन्न अन्जुमनों व दस्तों की ओर से भी महफिल का आयोजन होगा

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