ब्यूरो चीफ़ आरिफ़ मोहम्मद कानपुर देहात
भ्रष्टाचार में संलिप्त कानपुर मंडल के डीडी पंचायत सहित तत्कालीन व वर्तमान डीपीआरओ होंगे निलंबित
राज्य कंसलटेंट व पीएफएमएस विशेषज्ञ की सेवा होंगी समाप्त
निदेशक पंचायती राज उत्तर प्रदेश ,सीडीओ एवं डीएम से स्पष्टीकरण तलब करने के बाद होगी कार्रवाई
कानपुर देहात ।
कानपुर देहात में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के फेस दो कार्यक्रम के तहत तरल अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यों में वर्ष 2021–22 में किए गए करोड़ों रुपए के घोटाले के मामले में शासन पूरी तरह से सख्त हो गया है। जिला एवं राज्य स्तरीय अधिकारियों द्वारा की गई जांच के बाद जांच रिपोर्ट मिलते ही अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन कानपुर मंडल के उप निदेशक पंचायती राज अधिकारी तत्कालीन व वर्तमान डीपीआरओ व दो ग्राम सचिवों को निलंबित करने के निर्देश दिए है। इसी के साथ निदेशक पंचायती राज समेत सीडीओ एवं डीएम कानपुर देहात की लचर कार्यशैली से पर्यवेक्षणीय कार्य सही ढंग से ना हो पाने पर उनसे स्पष्टीकरण मांगते हुए विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिए गए। जबकि दायित्व में लापरवाही बरतने पर राज्य कंसलटेंट एवं पी एफ एम एस के विशेषज्ञ की सेवाएं समाप्त करते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी के तत्कालीन पटल सहायक के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। जिससे भ्रष्टाचार पर योगी सरकार का कड़ा फैसला देखने को मिला है।
कानपुर देहात में स्वच्छ भारत मिशन फेस दो के तहत ओडीएफ प्लस गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन कार्य के लिए वर्ष 2021- 22 में 347 ग्राम पंचायतों को चयनित कर 6.13 करोड़ रुपए की 31 नवंबर 2021 को सीसीएल निर्गत की गई थी। जिसको 6 महीने से अधिक समय तक जिला स्तर पर रोके रखा गया है जिला स्वच्छता समिति के द्वारा कोई भी बैठक नहीं की गई। इसके बाद 347 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष जुलाई 2022 से नवंबर 2022 तक 195 ग्राम पंचायतों में 4.9 करोड़ों रुपए की सीसीएल मनमाने ढंग से निर्गत कर दी गई। लेकिन जिले स्तर से सीसीएल स्वीकृति कर कोई भी डिस्पैच पत्र जारी नहीं किया गया। वही ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को करा कर पंचायत सचिवों की यूजर आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से बाउचर फीड करा कर प्रधान की चेकर की भूमिका में धनराशि को निर्गत किया जाना था। लेकिन जिला स्तर पर तैनात जिला पंचायत राज अधिकारी की मिलीभगत से जिला कंसलटेंट विमल पटेल ,शैलेश श्रीवास्तव व प्रदीप कुमार ने ग्राम प्रधानों के डोंगल जिला मुख्यालय पर मंगा कर ग्राम सचिवों की फर्जी यूज़र आईडी व पासवर्ड बना कर अपनी चहेती फर्मों में धनराशि का भुगतान कर दिया। इससे ग्राम पंचायतों में बिना काम कराए करीब तीन करोड़ 72 लाख रुपए का आहरण कर लिया गया जिसमें ठोस एवं तरल अपशिष्ट जल प्रबंधन के काम में व्यापक पैमाने पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया जिससे वित्तीय अनियमितता उजागर हुई। मामले का खुलासा होने पर शासन स्तर से जांच की गई उप निदेशक पंचायती राज ने मामले पर कार्यवाही के लिए पत्र भी लिखा। जिस पर शासन स्तर से जांच कराई गई जांच में उप निदेशक पंचायती राज कानपुर मंडल अभय कुमार शाही, कानपुर देहात तत्कालीन डीपीआरओ नमिता शरण एवं वर्तमान डीपीआरओ अभिलाष बाबू की संलिप्तता उजागर हुई। जिसमें कानपुर देहात के तीन जिला कंसलटेंट विमल पटेल, शैलेश श्रीवास्तव एवं प्रदीप कुमार की पूर्व में ही सेवा समाप्त कर दी गई। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह कानपुर मंडल के डिप्टी डायरेक्टर पंचायत अभय कुमार शाही तत्कालीन डीपीआरओ नमिता शरण एवं वर्तमान डीपीआरओ अभिलाष बाबू को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। जिला स्वच्छता समिति के खाते में 6 महीने तक सीसीएल की धनराशि पड़ी रहने और उसका सही ढंग से उपयोग ना होने पर तरल अपशिष्ट प्रबंधन के कारणों की समय से समीक्षा न करने पर्यवेक्षणीय दायित्व का सही ढंग से निर्वहन न करने का दोषी मानते हुए कानपुर देहात के डीएम समेत सीडीओ सौम्या पांडे एवं निदेशक पंचायती राज स्पष्टीकरण तलब करते हुए इनके विरुद्ध भी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। इसी के तहत योजना के कार्यों का सही ढंग से सर्वेक्षण न करने व समीक्षा में लापरवाही बरतने पर राज्य कंसलटेंट कानपुर देहात के नोडल संजय कुमार चौहान एवं पीएफएमएस के विशेषज्ञ राहुल गुप्ता की सेवा समाप्त करने का भी निर्देश दिया गया है। वही जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय कानपुर देहात में तैनात तत्कालीन पटल सहायक सुनील कुमार के विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही करते हुए जांच के निर्देश दिए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के करोड़ों रुपए के घोटाले में सीडीओ सहित पंचायत राज विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता उजागर हुई है। जिस पर सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है और शासन के द्वारा पांच अधिकारियों को निलंबित करते हुए आधा दर्जन लोगों की सेवा समाप्त करने व चार लोगों से स्पष्टीकरण तलब पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए जो योगी सरकार की भ्रष्टाचार निवारण नीति के तहत कड़ा प्रहार किया गया है।
