रोजाना एक पेड़ लगाने से क्या होगा शिवराज जी, रसूखदार काट रहे जंगल के जंगल: विजया पाठक

By | February 28, 2022

*आयएएस और आईपीएस ने बना डाले स्कूल, कॉलेज और फॉर्म हाउस*
*कांक्रीट में तब्दील कर दिया कलियासोत नदी के किनारों के जंगलों को

विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन
एक तरफ जहां सीएम शिवराज सिंह चौहान खुद पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षण का संदेश देने के उददेश्य से रोजाना एक पेड़ लगाने का कार्य पिछले एक साल से कर रहे हैं। अंकुर अभियान के माध्यम से पेड़ लगाए जाने कार्य किया जा रहा है। वहीं, रसूखदार बिल्डर्स, आईएएस और आईपीएस अधिकारी पेड़ों की कटाई का खेल खेलने से बाज नहीं आ रहे हैं।

राजधानी भोपाल में रहने वाले ये रसूखदार ऐसे हैं, जो जंगल को सीधे-सीधे नुकसान पहुंचा रहे हैं। अपने रसूख के बल पर इन लोगों ने कलियासोत नदी किनारे फॉर्म हाउस से लेकर स्कूल, कॉलेज सहित विश्वविद्यालय खोल दिये हैं। जंगलों को नष्ट करने का कारवां यही नहीं रूका।

अभी भी इनमें से कई रसूखदार ऐसे हैं, जो अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए लगातार वहां जंगलों को नष्ट करने का कार्य कर रहे हैं। इन रसूखदारों ने राजधानी भोपाल के कलियासोत नदी के किनारों के जंगलों को कांक्रीट में तब्दील कर दिया है। जबकि एक समय था जब यह क्षेत्र चारों तरफ से हरियाली से घिरा था लेकिन शासन की अनदेखी और अपने प्रभाव से इन रसूखदारों ने पूरे इलाके को नष्ट कर दिया है।

अब सवाल उठता है कि जब वन विभाग ने कलियासोत नदी के किनारे बसे चंदनपुरा गांव व आसपास के क्षेत्र को वन्य प्राणी क्षेत्र और वन्य क्षेत्र घोषित कर रखा है तो फिर वहां आईएएस-आईपीएस सहित रसूखदारों को फॉर्म हाउस, स्कूल और यूनिवर्सिटी बनाने की परमिशन कैसे मिली? वन्य क्षेत्रों से जुड़े कानून क्या सिर्फ आम लोगों के लिए बनाए गए हैं, आईएएस-आईपीएस सहित रसूखदारों के लिए इन कानूनों के कोई मायने नहीं है।

जिसका जितना रसूख उसे उतना ही कानून और नियम तोड़ने का अधिकार मिल जाता है। इन इलाकों में सीनियर आईपीएस ऑफिसर एसडब्ल्यू नकवी, रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर एसके मिश्रा सहित संस्कार वैली, सीआई ग्रुप के मलिक और भी काफी रसूखदारों ने पूरी जमीनों पर पेड़ों को नष्ट कर स्कूल, कॉलेज और फॉर्म हाउस बना लिये हैं।

सिर्फ 04 एकड़ की मिली थी परमिशऩ
शहर के नामी स्कूल संस्कार वैली को कलियासोत नदी किनारे स्कूल बनाने के लिए वन विभाग की तरफ से महज चार एकड़ जमीन दी गई थी। लेकिन अपने रसूख का उपयोग करते हुए इन लोगों ने 35 एकड़ क्षेत्र में निर्माण किया है जो पूरी तरह से अवैध है।

इस निर्माण के समय लाखों पेड़ों को काटा गया। जिसके बारे में कोई भी पूछने के लिए तैयार नहीं है। यही हाल अन्य अफसरों का भी है जिन्होंने वन्य क्षेत्रों में जाकर निर्माण कार्य किये हैं।
दिखानी होगी एकजुटता
जगत विजन ने पिछले दिनों छतरपुर के बक्सवाहा के जंगलों को न काटने का मुद्दा उठाया था। परिणामस्वरूप जंगल को बचाने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा आदिवासियों का समूह एकत्रित हो गया। अंततः राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को झुकना पड़ा। लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर के अंदर ही लगातार जंगलों को काटने का कार्य किया जा रहा है।

सरकार से लेकर शासन प्रशासन सहित वन विभाग का अमला खुद भी मूकदर्शक की तरह लाखों करोड़ों वृक्षों की बली का साक्षी बना हुआ है। यदि हम सब अब भी नहीं जागे तो वो दिन भी दूर नहीं जब शहर की हरियाली को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जायेगा।
किसान पर लगाया था 01 करोड़ चार लाख का जुर्माना

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में सागौन के दो पेड़ काटने पर एक किसान पर एक करोड़ चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। यह मप्र के इतिहास में वन अपराध में शायद पहला मामला था, जिसमें आरोपी को पेड़ काटने पर इतना भारी जुर्माना लगाने की कार्यवाही की गई।

वन विभाग ने दो सागौन पेड़ काटकर वनसंपदा को नुकसान पहुंचाने वाले आरोपी छोटे लाल निवासी वेलगांव पर एक करोड़ चार लाख 7 हजार 700 रुपए का जुर्माना आरोपित कर कोर्ट में चालान पेश किया था। इस कार्यवाही का मकसद सिर्फ लोगों को पेड़ों का महत्व समझाना था, लेकिन चालनी कार्यवाही केवल गरीब और आम लोगों पर होती है, अफसरों और रसूखदारों पर नहीं।

कैसे भूल सकते हैं वो दौर
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भोपाल सहित पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन को लेकर जो कष्ट उठाना पड़ा है, उसे भला भोपाल के लोग कैसे भुला सकते हैं। उस समय ऑक्सीजन की कमी के कारण कई लोगों ने अपने परिचितों और अपनों को खोया है। बावजूद उसके इन रसूखदारों के खिलाफ अब तक कोई कार्य़वाही नहीं हुई है।

इससे पहले भी तुलसीनगर-शिवाजी नगर के घरों पर भी स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर बुल्डोजर चलवाया गया। इस दौरान लोगों ने घरों से पेड़ों को हटाये जाने का विरोध किया, बावजूद उसके राज्य सरकार ने स्मार्ट सिटी को पेड़ों की कटाई रोकने संबंधी आदेश जारी नहीं किये।