द्वारकाधीश की नगरी है दिव्य !

By | June 15, 2023

रिपोर्ट – इशिका सिंह

अरब सागर के किनारे बसी है श्री कृष्णा द्वारकाधीश की नगरी “द्वारका ” जिसका उल्लेख पौराणिक कथाओं और महाभारत में भी देखने को मिलता है। महाभारत के अनुसार यह नगरी माता गांधारी के श्राप के कारण समुद्र में समां गई। वास्तविक द्वारका की नगरी समुद्र की गहराईयों में छिपी हुई है और तट पर स्तिथ है ” भेठ द्वारका ” जिसे हिन्दू धर्म में एक ज़रूरी तीर्थ स्थान की उपाधि दी गई है।

(फाइल फोटो)

अरब सागर में बना चक्रवाती तूफान ‘बिपारजॉय’ काफी तीव्र होता जा रहा है। अब यह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। आशंका जताई जा रही है कि तूफान द्वारका से टकरा सकता है, जिससे तटों पर भारी नुकसान होगा। साथ ही पूरे जिले में अतिवर्षा भी होगी। इसी आशंका के चलते पूरे द्वारका में अलर्ट है। रेस्क्यू, मेडिकल, फायर, बिजली विभाग, एनडीआरएफ के साथ आर्मी की एक टीम भी द्वारका में मौजूद हैं। लेकिन, इसके बावजूद द्वारकावासी निश्चिंत हैं। उन्हें पूरा यकीन है कि यह तूफान खत्म हो जाएगा और द्वारका पर इसका कोई असर नहीं होगा। दरअसल, द्वारका के लोगों का यह विश्वास भगवान द्वारकाधीश के चलते है।

(द्वारका के घाट)

द्वारकावासियों का विश्वास इसलिए अटल है क्योंकि पहले भी कई आपदाएँ आ चुकी हैं लेकिन मंदिर और यहाँ के लोगों पर आंच भी नहीं आई है। भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने १५६ बम मंदिर के ऊपर बरसाए लेकिन मंदिर को कोई हानि नहीं पहुंची। ९ जून १९९८ को आया चक्रवाती तूफ़ान भी इस नगरी को नुक्सान नहीं पहुँचा पाया। यहीं नहीं २००१ में गुजरात में आया भूकंप भी मंदिर को हानि नहीं पहुँचा पाया था। यहाँ तक की यहाँ रह रहे मुसलमानों ने यह तक कहा है की उन्हें द्वारकाधीश की महिमा पर पूर्ण विश्वास है।

(फाइल फोटो)

हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ ” चार धाम ” में से एक धाम द्वारका भी है।द्वारका सात मोक्ष पुरियों में से एक है।